Momentum Moves: Intraday aur Swing Trading Tactics (Hindi)
Dharmendra Rajbhar compares three trading styles in options: scalping, intraday and swing trading, and explains why each needs its own setup and strategy.
Scalpers take small moves of a few points with naked option buying, since option selling needs much more capital for the same move. For intraday trades, spreads are optional and depend on your confidence and back-tested setup. For swing trades held for several days, he recommends spreads, because time decay works against a naked bought option; Option Architect is used to compare a long call with a bull call spread on Nifty.
He then shows a tool for each style: Option Scalping under Quant Models for quick momentum signals, Triggers for OI-based support and resistance levels near the current price for intraday trades (avoiding expiry week), and the Trap Indicator for call writer and put writer trap signals for swing trades.
In this video
- 0:00Scalping, intraday aur swing: alag setups
- 1:15Scalping vs intraday: kitne points
- 3:47Scalping mein naked buying kyon
- 5:04Intraday mein spread optional
- 6:20Swing trading mein spread kyon
- 10:07Option Architect: bull call spread
- 11:22Har style ke liye tools
- 12:38Option Scalping tool
- 16:28Triggers se intraday levels
- 18:59Breakout aur breakdown wale stocks
- 20:14Swing ke liye Trap Indicator
- 21:29Session summary
What you’ll learn
Read and practise
Transcript
नमस्कार दोस्तों, मेरा नाम धर्मेंद्र राजभर है। Quantsapp के ऑप्शन की सीख के सेशन में आपका स्वागत है। जहां पर हम सीखते हैं ऑप्शन के कुछ कांसेप्ट। जहां पर हम सीखते हैं कि ऑप्शंस को कैसे ट्रेड किया जा सकता है और क्या-क्या तरीके हैं। सो दोस्तों, आज मैं उसी के बारे में बात करने वाला हूं कि ऑप्शन को कैसे यहां पर ट्रेड करेंगे। हम बात करेंगे स्कैल्पिंग के बारे में, बात करेंगे इंट्राडे ट्रेड के बारे में। हम बात करेंगे स्विंग ट्रेडिंग के बारे में। और यहां पर मैं थोड़ा सा आपसे डिस्कस करूंगा कि ऑप्शन स्ट्रेटजीस कौन सी आपको हेल्प कर सकती हैं जो भी आप ट्रेडिंग लेते हैं उसमें प्रॉफिटेबल बने रहने के लिए और आपका लॉस कैसे कम हो सके उसके बारे में डिस्कस करेंगे। राइट? तो चलिए मैं अपना स्क्रीन शेयर करता हूं। फिर हम आगे बात करेंगे कि जो भी कांसेप्ट है वो कैसे यहां पर हम उसको समझ सकते हैं। तो दोस्तों यहां पर मैंने तीन चीजें आपसे बात की है। यहां पर मैंने बात किया है स्कैल्पिंग के बारे में। यहां पर स्कैल्पिंग, यहां पर मैंने बात किया है इंट्राडे ट्रेड के बारे में और स्विंग ट्रेडिंग के बारे में। ठीक है? तो दोस्तों तीनों के लिए मैं कहूंगा कि हमारे पास डिफरेंट सेटअप्स होता है। हम किसी एक पर्टिकुलर सेटअप पे हम ट्रेड नहीं करते हैं। हमारे पास डिफरेंट सेटअप्स होता है। जो भी सेटअप आपके पास होंगे, जो भी सेटअप हम देखते हैं, हमारे पास डिफरेंट सेटअप होता है। हम कभी भी किसी एक पर्टिकुलर सेटअप पे हम काम नहीं कर सकते।
मतलब ये है कि अगर मैं इसमें स्कैल्पिंग के लिए जा रहा हूं, इंट्राडे के लिए जा रहा हूं तो तीनों में मेरा अलग-अलग यहां पर कांसेप्ट होगा। तीनों में मेरा अलग-अलग यहां पर सेटअप होगा। एंड उसी के मुताबिक मुझे उसमें ट्रेड बनाने होंगे। मैं ऐसा नहीं कर सकता हूं कि स्कैल्पिंग में मेरे लिए जो स्ट्रेटजी है वही चीज मैं इंट्राडे में भी करूं, वही चीज मैं स्विंग ट्रेडिंग में करूं। ये इसमें हमारा नहीं हो सकता है। ठीक है? तो हम वहां पर क्या करते हैं? हम जो भी कांसेप्ट वहां पर हम लेते हैं एंड उसी के मुताबिक वहां पर सोचते हैं। तो मतलब यह है कि अगर मैं यहां पर सोच रहा हूं कि अगर मुझे स्कैल्पिंग में लेना है तो स्कैल्पिंग में आप देखिए आपका एक पर्टिकुलर सेटअप होता है। जब भी आप स्कैल्पिंग ट्रेडिंग करते हैं तो स्कैल्पिंग में क्या सेटअप होता है कि आपने कोई पर्टिकुलर ट्रेड लिया जैसे मान लीजिए कोई भी आपने ट्रेड लिया, इसको आपने, जैसे कि Nifty, मैं यहां पर Nifty कंसीडर करता हूं। तो Nifty में मान लीजिए 5 टू 10 पॉइंट्स आपने लिया और उसको एग्जिट कर लिया। राइट? 5 टू 10 पॉइंट्स लेकर आपने यहां पर एग्जिट कर लिया। यह एक कॉमन कांसेप्ट है जब भी आप इसमें Nifty में ट्रेड करते हैं कि पांच से 10 पॉइंट आपने ले लिया और आपने उसको एग्जिट कर लिया। सिमिलरली जब इंट्राडे ट्रेड में जाते हैं इंट्राडे में तो इंट्राडे में आप देखोगे यही मूव बड़ा बन जाता है। तो इसमें 5-10 पॉइंट नहीं आता है। इसमें 50 टू 100 पॉइंट्स आता है। ठीक है? क्यों इतना डिफरेंसेस होता है? तो
चलिए इस पर डिस्कस करते हैं। देखिए स्कैल्पिंग कैसा होता है कि स्कैल्पिंग छोटा-छोटा मूव आप पकड़ते हो। छोटा-छोटा मूव जो रहता है वो हम पकड़ते हैं। एंड छोटा-छोटा मूव में आप देखोगे कि लॉसेस भी आपके थोड़े कम होते हैं। प्रॉफिट भी आपका कम होता है। ठीक है? तो लोग क्या करते हैं? इसको स्केल अप करते हैं। स्टार्टिंग में यहां पर क्या करते हैं? स्टार्टिंग में आप देखोगे वो वन लॉट से शुरू करते हैं। फिर धीरे-धीरे बढ़ाते बढ़ाते उसको दो लॉट, पांच लॉट, 10 लॉट फिर यहां पर जाते हैं। ठीक है? अकॉर्डिंग टू उनकी कैप जो भी उनकी कैपेसिटी है उसके मुताबिक यहां पर ये मूव करते हैं। तो उन्होंने एक लॉट से देखा, 10 लॉट से देखा उसके मुताबिक वहां पर वो अपना प्रॉफिट वहां पर बनाना शुरू करते हैं। ठीक है? तो ये आपका स्कैल्पिंग हो गया। स्कैल्पिंग में छोटे-छोटे पॉइंट्स यहां पर मूव करते हैं। सिमिलरली इंट्राडे हो गया। इंट्राडे में क्या करेंगे? 50 टू 100 पॉइंट्स का यहां पर वो उम्मीद रखते हैं कि मुझे इतना पॉइंट मिल सके। अभी जब ऑप्शन की बारी आती है जाहिर सी बात है Nifty में 100 पॉइंट्स निकालना आज के टाइम पर मैं कहूंगा कि उतना डिफिकल्ट नहीं, लेकिन पहले तो काफी डिफिकल्ट होता था, लेकिन फिर भी मैं 50 पर जुड़ा रहूंगा कि ये 50 तक हम यहां पर कंसीडर करते हैं कि मुझे स्कैल्प... मुझे इंट्राडे में 50 पॉइंट्स मिल सके। अभी दोस्तों यहां पर स्कैल्पिंग और इंट्राडे में मैं कहूंगा कि जो अंतर मैं बता रहा हूं उसी के हिसाब से
स्ट्रेटजीस में भी अंतर आते हैं। कैसे वो अंतर आते हैं? चलिए डिस्कस करते हैं। फिर हम स्विंग ट्रेडिंग पर आएंगे। तो यहां पर जब भी मैं स्कैल्पिंग और इंट्राडे की मैं बात करता हूं। स्कैल्पिंग में देखिए आप कोई ऑप्शन स्ट्रेटजीस अगर आप लेकर चलते हैं ऑप्शन स्ट्रेटजीस तो मैं कहूंगा कि वो टोटली रॉन्ग स्टेप होगा। मतलब कि जो ऑप्शन स्ट्रेटजीस हम जो बनाते हैं डेबिट स्प्रेड या क्रेडिट स्प्रेड जो बनाते हैं ये आप स्कैल्पिंग में तो बिल्कुल नहीं बना पाएंगे क्योंकि स्कैल्पिंग में क्या होता है? आप नेकेड बाय करते हैं। राइट? उसमें नहीं सेलिंग भी नहीं होती है। सीधा बाइंग होती है। स्कैल्पिंग में मैं कहूंगा कि सेलर्स जो है उनके लिए प्रॉफिटेबल नहीं होता। क्योंकि जब आप सेलिंग करते हैं ऑप्शन सेलिंग तो आपको ₹1.5 लाख, 2 लाख ऐसा कुछ वहां पर कैपिटल लगता है। 3 लाख भी कैपिटल लगता है। एंड उसमें ₹1.5 लाख में कैपिटल आप लगेगा और 10 पॉइंट अगर नीचे आता है तो आपको ₹750 मिल रहे हैं। ₹750 में आप देखोगे कि सेलिंग आपने की है तो आपको ब्रोकरेज उसके मुकाबले ज्यादा लगेगा। राइट? तो ब्रोकरेज आपको ज्यादा लग रहा है। तो जब ज्यादा ब्रोकरेज लग रहा है तो 500 बना के कुछ उसमें मतलब ही नहीं होता है। लेकिन यही चीज अगर आप बाइंग करते हो तो बाइंग में आप एक ही लॉट आप ले रहे हो और मान लीजिए कि वो 200 का स्टॉक है 200 आई मीन 200 का वो ऑप्शन है तो जाहिर सी बात है यहां पर आप अगर आपने बाइंग की है तो हार्डली आपका यहां पर 75 क्वांटिटी के हिसाब से आपका ₹15,000 लग रहे हैं, एंड जिसमें 500 मिल रहे हैं। सो आप देख सकते
हो कि कितना अच्छा परसेंटेज है वो रिटर्न का। ठीक है? तो ये परसेंटेज वाइज देखोगे तो बहुत डिफरेंस हो जाता। ठीक है? तो इसलिए ऑप्शन में जो स्कैल्पिंग होती है क्योंकि कई लोग पूछेंगे स्कैल्पिंग में हमें ऐसा करना चाहिए? बिल्कुल नहीं करना चाहिए। अगर वो ऐसा करते हैं मतलब उनको स्कैल्पिंग का मतलब ही नहीं पता। ठीक है? फिर आते हैं इंट्राडे पार्ट पर। अभी इंट्राडे में क्या हमें स्प्रेड से जाना चाहिए? मैं कहूंगा जो आज का जो टाइम है जैसे कि आप देखोगे कि जो एक्सपायरी है बहुत नजदीक होती है तो जाहिर सी बात है इसमें हमें टाइम डिके थोड़ा देखने को मिलता है। इन द बिगिनिंग अगर आप जाते हैं तो उतना स्प्रेड हमें बनाने की जरूरत नहीं पड़ती है। बट राइट नाउ आप एक ट्रेड को थोड़ा लंबा होल्ड करते हो तो यहां पर कहीं ना कहीं मुझे स्प्रेड बनाने की जरूरत पड़ती है। तो हम क्या करते हैं? हम यहां पर कई जगह आप देखोगे क्रेडिट स्प्रेड या डेबिट स्प्रेड हम इसमें बनाते हैं। ठीक है? लेकिन मैं कहूंगा कि यह जो स्प्रेड आप बनाते हो यह ऑप्शनल होता है। अगर जो इंट्राडे आपने जो स्ट्रेटजी चुनी है और आपको ऐसा लग रहा है कि इसका स्ट्राइक रेशियो काफी अच्छा है एंड आपको ऐसा भी लग रहा है कि जो स्ट्राइक रेशियो के मुताबिक आपको ऐसा भी लग रहा है कि जो प्रॉफिट है वो मेरा 1:2 1:3 काफी अच्छा मिल जाता है। एंड यू आर कॉन्फिडेंट इनफ तभी आप उसमें नेकेड ऑप्शन से जा सकते हैं। अदरवाइज अगर आपको इसमें इतना कॉन्फिडेंस नहीं है तो आप इसमें स्प्रेड बना के जाइए
ताकि इन द बिगनिंग आप इतना पैसा उसमें लूज ना करें। ठीक है? तो कहने का मतलब यही है कि जो इंट्राडे जो ट्रेड करते हैं इसमें जब ऑप्शन स्ट्रेटजीस चुनने की बारी आती है तो पूरी तरीके से ऑप्शनल है। पूरी तरीके से ऑप्शनल है। यानी ये पूरा डिपेंड करता है आपके माइंडसेट पे कि आप किस तरीके से सोचते हैं। आप का जो स्ट्रेटजी है आपने उसको कितना बैक टेस्टिंग किया है। कितना कॉन्फिडेंस है और आप क्या उसमें एडजस्टमेंट कर सकते हैं। ये पूरे तरीके से आप पे डिपेंड करता है। ठीक है? ठीक है? इंडिविजुअली डिपेंड करता है। तो यहां पर जब मैं कहूं कि ऑप्शन स्ट्रेटजी चुनना है तो ये पूरा आपके ऊपर है। ठीक है? अभी आती है स्विंग ट्रेडिंग। ठीक है? तो जब स्विंग ट्रेडिंग जब हम करते हैं तो स्विंग ट्रेडिंग में हम क्या करते हैं? हम इसको कुछ दिनों के लिए होल्ड करते हैं। राइट? हम इसको कुछ दिनों के लिए होल्ड करते हैं। मतलब यह कि अगर मैंने कोई ऑप्शन मैंने कोई पर्टिकुलर स्टॉक में देखा कि उसमें स्ट्रेटजीस बन रही है। आई मीन जो मेरा सेटअप है बाइंग एंड सेलिंग का जो भी मेरा सेटअप है जिसमें जिसके तहत मैं किसी भी पर्टिकुलर स्टॉक के ऑप्शन को बाय करता हूं या फिर उसको सेल करता हूं। तो उसके तहत मैं यहां पर देखूंगा कि उसमें अपॉर्चुनिटी मुझे मिल रही है। तो क्या मुझे इसमें स्प्रेड से जाना चाहिए? मैं यह कहना चाहूंगा कि स्विंग ट्रेडिंग में तो हमें स्प्रेड से जाना ही चाहिए। रीजन इसके पीछे हम बता देते हैं। रीजन यह
है कि आप इसको कुछ दिनों के लिए होल्ड करते हो। राइट? स्विंग ट्रेडिंग को मैं होल्ड करता हूं। तो मेरा होल्डिंग पीरियड होता है यहां पर। ठीक है? मैं इसको होल्ड कर रहा हूं। कितने दिन के लिए होल्ड कर रहा हूं? यह भी डिपेंड करता है। मैं इसको 3 दिन के लिए होल्ड कर रहा हूं, 5 दिन के लिए, 10 दिन के लिए होल्ड कर रहा हूं। तो देखिए दोस्तों, जब भी आप पर्टिकुलर ऑप्शन को बाइंग जब स्पेसिफिकली जब आपने बाइंग किया है, ठीक है? जब आपने किसी ऑप्शन को यहां पर बाइंग किया है और आप उसमें ट्रेड करना चाहते हैं। आप सोचते हैं कि यह ऑप्शन को बाइंग किया और मैं इसको होल्ड करता हूं। तो जब भी आप इसको होल्ड करने जाएंगे तो आप देखिए ऑप्शंस का जो एक सबसे बड़ा दुश्मन होता है ऑप्शन में जो बायर्स का दुश्मन होता है वो होता है थीटा डिके यानी कि टाइम डिके। तो यहां पर आप 3, 5, 10 जब ऐसा होल्ड करते हो इतने दिन होल्ड करते हो तो टाइम डिके बहुत बड़ा असर होता है। टाइम डिके की वजह से यहां पर लॉस होना शुरू होता है। जब भी आप किसी ऑप्शन को बाय करते हो तो यहां पर टाइम डिके काफी हद तक हद से ज्यादा इस पे काम करता है और वहां पर आप देखोगे लॉस होना शुरू होता है और वहीं पर आप देखोगे कि कई लोग इस तरीके से लॉस करते हैं। मैंने देखा कई लोगों को कि उन्होंने क्या किया है नेकेड ऑप्शन बाय किया है और वहां पर उसको होल्ड किया हफ्ते भर दो हफ्ते भर और सोचते हैं कि मेरे बाइंग के
पास आ जाए, मेरे बाइंग के पास आ जाए, मेरे बाइंग से थोड़ा ऊपर जाए, मुझे प्रॉफिट मिले। लेकिन दोस्तों, जब मार्केट साइडवेज होता है तो अक्सर आप देखोगे वहां पर लॉस होता है, क्योंकि टाइम डिके है तो आपका जो बाइंग वैल्यू है वो बहुत नीचे आ जाती है। ठीक है? मतलब जो बाइंग प्राइस है उसके नीचे पूरी वैल्यू आ जाती है। तो अगर आपने किसी ऑप्शन को ₹200 में बाय किया है तो यहां पर वो ₹200 नहीं रहने वाला है। ठीक है? इसी चीज से बचने के लिए इसी चीज से बचने के लिए हमने स्प्रेड का इस्तेमाल किया। स्प्रेड में क्या होता है? आपने एक ऑप्शन को बाय किया है। एक ऑप्शन को आपने बाय किया है और उसी में एक OTM ऑप्शन को आप क्या करते हैं? सेल करते हैं। अब इसका फायदा क्या होता है? जब आप OTM ऑप्शन को सेल करते हैं। जब भी आप OTM ऑप्शन को सेल करते हैं। तो यहां पर एक चीज यहां पर एक जो पर्टिकुलर आपने ऑप्शन लिया है उसको आपने हेज कर दिया है। कैसे किया है? जो सेलिंग किया है उसका भी टाइम डिके होगा। उसका भी टाइम डिके होगा। राइट? दोनों ऑप्शन का टाइम डिके होगा। तो लेकिन इसको आपने सेल किया है। तो जितना वो डिके होगा आपका वहां पर जो प्रॉफिट होगा। तो आपका बाइंग वाला जो डिके हो रहा है उसमें तो आपको लॉस हो रहा है लेकिन सेलिंग वाला जो डिके वह प्रॉफिट हो रहा है। तो आपका जो बाइंग है वह आप देखो जो आपका मैं कहूंगा कि जो स्प्रेड आपने बनाया है उसमें जो लॉसेस है वो मिनिमाइज हो जाते हैं। आपको हम यहां पर
दिखा देते हैं। ठीक है? मैं आपको स्क्रीन पे लेके चलता हूं। यहां पर हम देखते हैं। सो लेट मी शो माय स्क्रीन। तो टूल्स में हम आते हैं एंड Option Architect यहां पर देखते हैं। अभी देखिए जैसे मैं यहां पर Nifty ले लेते हैं। यहां पर Nifty ले लेते हैं। ठीक है? और मैं बुलिश हूं। ठीक है? चलिए मैं बुलिश हूं। तो देखिए अगर मैं लॉन्ग कॉल यहां पर ऑप्शन में ले रहा हूं। अभी जो एक्सपायरी है मैं एक्सपायरी चेंज कर देता हूं। एक हफ्ते का ले लेता हूं। ठीक है? और 25,400 का है। देखिए 184 का है। अब लॉसेस देखिए मेरा कितना है। अगर मैं यहां पर मैं देखता हूं तो मेरा लॉसेस देखिए 13,000, मतलब कि जो फुल वैल्यू है 13,000 जो यहां पर लग रहा है वो 13,000 का मेरा लॉस है। प्रॉफिट भी इसमें अनलिमिटेड होगा। बिकॉज़ यह टोटली नेकेड बाइंग है। लेकिन जैसे ही मैं यहां पर स्ट्रेटजी को चेंज करता हूं, मैं यहां पर स्प्रेड बनाता हूं। ठीक है? बुल कॉल स्प्रेड अगर मैं इसको चुनता हूं, तो बुल कॉल स्प्रेड में अगर मैं इसको सेलेक्ट करता हूं, तो देखिए जो मेरा लॉसेस है, देख सकते हो 1,600 पर आ गया। जहां पे मुझे 13,000 का लॉस हो रहा था, वहां पे टोटली यहां पर देख सकते हो 1,600 में आ गया। राइट? तो अगर मैं इसको बाय करके होल्ड करता हूं। मुझे लगता है कि ये यहां पर जा सकता है। तो मेरा मैक्स टू मैक्स मेरा लॉस आप देख सकते हो मेरा यहां पर 1,600 आ गया। एंड वहीं पे वहीं पे आप देख सकते हो कि मेरा मैक्सिमम प्रॉफिट कितना है? 2,100 आपका प्रॉफिट भी
लिमिट हो जाता है। इसको जरा हम एक काम करते हैं। थोड़ा सा इसको चेंज करते हैं। एंड इसको भी मैं तीन वाला जोड़ लेता हूं। ठीक है? देख सकते हो इसमें देखिए। 1,700 का प्रॉफिट है। 1,900 का लॉस है। यहां पर ऐसा दिख रहा है। थोड़ा सा हम एक काम करते हैं कि इसको थोड़ा सा बढ़ा देते हैं। हो सकता है कि मुझे प्रॉफिट थोड़ा ज्यादा मिले, लॉसेस कम मिले। ऐसा हो सकता है। ठीक है? 1:2, 1:3 का रेशियो आपको यहां पर मिलना शुरू हो जाएगा। तो इसके तहत हम यहां पर क्या करते हैं? एडजस्टमेंट करते हैं। तो दोस्तों, यह जो ऑप्शन स्ट्रेटजीस बताने का मकसद ही यही था कि आप यह जानिए कि आप जो स्ट्रेटजी जो जिस तरीके का आप ट्रेड कर रहे हैं, उसमें कौन सी स्ट्रेटजी अपनाना आपके लिए ठीक रहेगा। आप जो ऑप्शन स्ट्रेटजीस लेते हैं वो किस में ज्यादा फायदेमंद होगा? ठीक है? तो चलिए दोबारा बोर्ड पर चलते हैं। एंड वहां पर जैसे कि हमने डिस्कस किया स्कैल्पिंग में। ठीक है? तो मैंने आपको स्कैल्पिंग के लिए बोला। मैंने आपको इंट्राडे के लिए मैंने आपको बताया। ठीक है? और फिर मैंने आपको यहां पर स्विंग ट्रेडिंग के लिए बताया। तो चलिए आपको दिखा देते हैं कि तीनों के लिए कौन से टूल आपके लिए काम आएंगे। राइट? मैंने तरीका तो आपको बता दिया। अगर आपको टूल नहीं पता तो फिर आप उसमें ट्रेड कैसे करेंगे। ठीक है? तो चलिए आपको टूल पर लेकर चलते हैं। अगेन यहां पर अब यहां पर चलते हैं Quantsapp एप्लीकेशन में। तो यहां टूल्स में आइए और देखिए Quant Models में यहां
पर आपको Option Scalping नाम का आपको एप्लीकेशन मिलेगा। तो इसको सेलेक्ट करिए Option Scalping को। अभी यहां पर आप देख सकते हैं। ठीक है? यहां पर क्लियरली देख सकते हैं। यहां पर देखिए लेफ्ट साइड के कॉलम में आपको इंस्ट्रूमेंट दिया गया है, सिंबल दिया गया है और सिग्नल टाइम दिया गया है। तो यहां पर आपको जितने भी स्टॉक्स हैं प्लस इंडाइसेस हैं दोनों के ऑप्शंस यहां पर आपको आते हैं। दोनों के ऑप्शंस आते हैं। आपको यहां पर टाइम मेंशन किया होगा। आपको यहां पर सिंबल मेंशन किया होगा। यहां पर आपको इंस्ट्रूमेंट भी मेंशन किया होगा और बाय एंड सेल का आपको यहां पर बताया गया है। तो आप इसको भी क्लिक करेंगे तो आपका डायरेक्टली बाइंग आपका अगर ब्रोकर अकाउंट इस पे कनेक्टेड है तो डायरेक्टली आपका बाय होगा। आपको एक ऑर्डर मैनेजमेंट का बुक आएगा। सिंपली उस पे अपना अकाउंट सेलेक्ट करके आप डायरेक्टली उसको बाय कर सकते हैं। ठीक है? तो यहां पर हम चलते हैं अगेन Option Scalping में। ठीक है? तो यहां पर मैंने आपको बाइंग वाला बताया। अभी देखिए यहां पर ये ट्रिगर यहां पर आपको प्राइस है। फिलहाल अभी यहां पर कुछ डिटेल्स मैंने इसको बाय नहीं किया इसलिए वहां पर नहीं दिख रहा है। लेकिन आप देख सकते हो कि कैसे यहां पर ट्रेड आता है। अभी जैसे देखिए ICICI Prudential, ठीक है? यहां पर आप देख सकते हो ₹650 का कॉल ऑप्शन ₹23.45 पर आ रहा है। तो चलिए हम इसको चार्ट पर जाके देखते हैं। तो यहां पर ICICI Prudential मैंने यहां पर चुना हुआ है और
इसका हम लेते हैं 650 का कॉल ऑप्शन। ठीक है? ये वाला 650 का कॉल ऑप्शन। आई एम सॉरी, यह मेरे ख्याल से यहां पर, ओके, 31 जुलाई का है। सॉरी। तो 31... चलिए 31 जुलाई का यहां पर लेते हैं। सो यहां पर 31 जुलाई, ठीक है, 23.45। ओके? तो देखिए अभी यह पूरा ऊपर-ऊपर जा रहा है, तो ये रहा 23। ठीक है? तो मैं क्या कर सकता हूं? मैं इसको परचेस कर सकता हूं। ठीक है? एंड परचेस करने के बाद मैं वेट करूंगा कि यहां से कुछ पॉइंट ऊपर जाए तो मुझे वहां पर प्रॉफिट मिल सकता है। अभी इसमें कितना प्रॉफिट मिल सकता है? तो यहां पर हम क्या करेंगे? हम इसको देखेंगे कि कितना प्रॉफिट यहां पर मिल सकता है। तो पोटेंशियल बुलिश है। ठीक है? जस्ट मैं आपको एक लॉट साइज यहां पर बताना चाह रहा हूं। तो लॉट साइज यहां पर 750 का है। तो यानी कि अगर मेरा ₹1 भी ऊपर जाएगा तो मुझे यहां पर 750 का मुझे प्रॉफिट दिखेगा। ₹2 जाएगा तो 1,500 का प्रॉफिट मिलेगा। तो अपने रिस्क के हिसाब से और अपनी जो कैपेसिटी है, मतलब मैं कितना प्रॉफिट ले सकता हूं, उसके हिसाब से आप इसमें पॉइंट बुक कर सकते हो। ठीक है? वापस चलते हैं। तो देखिए अभी SRF का आया हुआ है। तो SRF का 3,100 का कॉल आया हुआ है। तो ऐसे ही आपको मल्टीपल टाइम यहां पर ट्रेड आपको आते रहेंगे। आप उसमें पिकअप कर
सकते हो। देख सकते हो सिर्फ मॉर्निंग यहां पर शुरू हो जाता है। ठीक है? अभी देख सकते हो कि कितना जल्दी-जल्दी यहां पर ट्रेड आया। नंबर ऑफ क्वांटिटीज भी आप देख सकते हो। ठीक है? राइट साइड वाला जो कॉलम है ये आपका बताया गया है कि जो मोमेंटम ट्रिगर हुआ था वो मोमेंटम यहां पर फॉल्ट हो चुका है। ठीक है? तो मतलब कि कई लोग क्या करते हैं कि उन्होंने ऑप्शन को बाय किया लेकिन उन्होंने एग्जिट नहीं किया। तो यहां पर वो एग्जिट का भी बताता है। राइट? लेकिन एज़ अ स्कैल्पर मैं आपको कहना चाहूंगा कि आप दो-तीन पॉइंट लेके एग्जिट कर लीजिए। जो भी स्टॉक ऑप्शन है, तो स्टॉक ऑप्शन में आपको और जल्दी यहां पर एग्जिट करना चाहिए, क्योंकि उनका जो लॉट साइज होता है वो काफी बड़ा होता है। अभी-अभी हमने देखा ICICI Prudential, 750 का लॉट्स है, तो वहां पर आप देख सकते हो कि उतना बड़ा लॉट साइज है। तो जाहिर सी बात है, मैं ज्यादा अगर होल्ड करूंगा, ₹10 नीचे आएगा तो मुझे ज्यादा लॉस होगा। तो उसके हिसाब से मुझे उसको होल्ड करना चाहिए, उसके हिसाब से मुझे एग्जिट करना चाहिए। ठीक है? चलिए, चलिए हम आगे चलते हैं एंड अभी इंट्राडे के बारे में बात करते हैं। तो इंट्राडे के लिए आप Track में जाइए। Track में Options OI में Triggers नाम का टूल है। आप इसको सेलेक्ट करिए। ठीक है? तो दोस्तों, अगर आप स्टॉक ऑप्शंस में ट्रेड करते हैं, वो भी इंट्राडे, तो यह आपके लिए एक बढ़िया टूल है। ठीक है? इस टूल की मैं खासियत आपको बता देता हूं। देखिए दोस्तों, मैं अपने सेशन में हमेशा बताता हूं कि लेवल्स का वेट करिए। लेवल्स पे ब्रेकआउट का वेट करिए। सस्टेनेंस का वेट करिए, कि अगर कोई स्टॉक उस लेवल पर आता है तो सस्टेन करता है तो
तब आप उसको बाय करिए। राइट? रेजिस्टेंस ब्रेकआउट हो रहा है तब बाय करिए। सपोर्ट ब्रेकडाउन कर रहा है तब बाय करिए। मैं ऐसा कंडीशन आपको बताता रहता हूं। राइट? तो इसमें आप देखिए क्या होता है कि अलग-अलग टाइम फ्रेम पे अलग-अलग आपको लेवल्स मिलते हैं। अलग-अलग सपोर्ट रेजिस्टेंस मिलते हैं। ठीक है? मतलब कि 15 मिनट में आपको अलग सपोर्ट रेजिस्टेंस मिलेगा। 5 मिनट में आपको अलग मिलेगा। 3 मिनट में अलग मिलेगा। कई बार तीनों एलाइन करते हैं। दोनों दो टाइम फ्रेम अलाइन करते हैं। इस बात में कोई मैं कहूंगा कि दो राय नहीं है। ठीक है? आप देख सकते हो कई बार एलाइन करते लेकिन कई बार एलाइन नहीं करते हैं। ठीक है? एक बात तो ये हो गई। दूसरी बात आप कितने स्टॉक में बार-बार ऐसा देखते रहेंगे। ठीक है? आप चार-पांच स्टॉक को आप देख लेंगे। राइट? कि ठीक है, ये लेवल्स है। चलिए कल ब्रेकआउट होगा तो हम ट्रेड लेंगे। ठीक है? तो आप क्या करेंगे? वह कुछ जो स्टॉक है, चुनिंदा स्टॉक है, आप उनको फिल्टर करके आपने रख लिया और आप यह कर सकते हो जो कि कोई गलत नहीं है। वो चुनिंदा स्टॉक हो सकता है आपके फेवरेट स्टॉक हो जिनको आप रोजाना लेते होंगे। ठीक है? अभी मैं आपसे यह कहूं कि हमारे पास एक ऐसा टूल है जो आपको रेजिस्टेंस और सपोर्ट ऑन द बेसिस ऑफ़ डाटा बताता है कि ये डाटा के हिसाब से यह रेजिस्टेंस है। ये सपोर्ट है। इसको ब्रेक करेगा तो मैं कॉल बाय करूंगा। इसको ब्रेक करेगा तो मैं सपोर्ट बाय करूंगा। ठीक है? तो वो है आपका Triggers। यहां पर दोस्तों टाइम का कोई कांस्टेंट नहीं है। मतलब टाइम का कोई
प्रॉब्लम नहीं कि ये 5 मिनट के टाइम फ्रेम है कि 10 मिनट के टाइम फ्रेम है। ये आपको ऑन द बेसिस ऑफ़ OI डाटा स्टैटिकल डे डेटा पे बताता है कि कहां पर हाईएस्ट OI है। यानी कि ये आपका एक स्ट्रांग रेजिस्टेंस है। स्ट्रांग सपोर्ट है वो आपको बताता है। एंड उसी के बुनियाद पे आप यहां पर ट्रेड लेते हो। ठीक है? जैसे कि AT Industries है। यहां पर 500 का स्ट्राइक है। मतलब कि 500 का स्ट्राइक अगर ब्रेक करेगा तो आप वहां पर कॉल बाय कर सकते हो। 430 का अगर लेवल ब्रेक करेगा तो आप वहां पर पुट बाय कर सकते हैं। ठीक है? अभी दोस्तों यहां पर एक चैलेंज है। ठीक है? चैलेंज ये है कि 200 से ज्यादा स्टॉक है। 220-230 F&O स्टॉक्स है। कौन सा स्टॉक जो अपने रेजिस्टेंस के पास है कौन सा सपोर्ट के पास है हमें पता नहीं है। राइट? तो आप यहां पर क्या कर सकते हैं? स्ट्राइक जो है इसको स्ट्राइक के बगल में देखिए कॉल डिफरेंस है। आप इसको सेलेक्ट करिए। यहां पर देखिए कॉल डिफरेंस जो है वह 0 से 1% के बीच में है। तो मतलब 0 से -1% के बीच में जो है 0 से 1% पॉजिटिव जो है वो है रेजिस्टेंस के पास। जैसे देख सकते हो National Aluminium 190 का प्राइस है। 189 फिलहाल प्राइस है। SBI Life आप देख सकते हो 1860 का स्ट्राइक है। 1851 चल रहा है। तो ये अपने रेजिस्टेंस के पास है। यह ब्रेकआउट करेगा तो मैं ट्रेड ले लूंगा। ठीक है? आप यहां पर देख सकते हो। अभी आपको
देखना है कि ब्रेकआउट कौन सी की है। तो उसके लिए आप क्या करिए? थोड़ा सा स्क्रॉल करिए ऊपर और देखिए जो नेगेटिव कॉल डिफरेंस है यह इन्होंने ब्रेकआउट किया है। जैसे ICICI General Insurance 2000 का स्ट्राइक है 2008 चल रहा है। JSW Steel 1000 का 1020 का स्ट्राइक है। 1024 चल रहा है। तो ये अपना रेजिस्टेंस के पास है। आई मीन रेजिस्टेंस ब्रेकआउट कर चुका है। तो आप इसमें ट्रेड बना सकते हो। ठीक है? साथ ही साथ आप चेंज इन OI को चेक करिए। देखिए कि चेंज इन OI नेगेटिव है या नहीं। अगर चेंज इन OI नेगेटिव है तो जरूर उसमें ट्रेड आप बना सकते हो। तो दोस्तों एक इसमें मैं कहूंगा कि एक ड्रॉबैक नहीं कहेंगे हम ये कहेंगे कि कंडीशन है। ठीक है? कंडीशन ये है कि चेंज इन OI जो है वो चेंज होता रहता है। तो आप जो एक्सपायरी वीक है उसमें अवॉइड करिए। बाकी सभी हफ्ते में आप इसमें ट्रेड कर सकते हो। एक्सपायरी के दो दिन पहले इसमें मत देखिए। बिकॉज़ चेंज इन OI का मतलब होता है कि जो राइटर्स वो एग्जिट कर रहे हैं। तो जाहिर सी बात है पोजीशन अपनी जो एग्जिट कर रहे हैं तो वो आप देखोगे प्रॉफिट में भी बुक कर सकते हैं, लॉस में भी बुक कर सकते हैं। तो इसका कुछ खास असर नहीं पड़ता एक्सपायरी के लिए। ठीक है? सिमिलरली पुट डिफरेंस का भी यही है। मतलब कि पुट साइड की ओर पुट डिफरेंस पर क्लिक करिए। तो जो 0 से वन के बीच में है पॉजिटिव और सपोर्ट के पास है। आप चेक कर सकते हो Indian Hotels, 7... 77... 770 का स्पॉट
वो सपोर्ट है। एंड अभी फिलहाल स्पॉट प्राइस 774 है। ₹4 ऊपर है। जैसे ही वो 770 के नीचे जाएगा हम ट्रेड लेंगे। तो पुट डिफरेंस में भी नेगेटिव देखिए जैसे 0.16 है, -0.19 है। इन्होंने ब्रेकडाउन कर चुके हैं। जैसे KEI है 3800 का स्ट्राइक है। 3792 चल रहा है। ₹8 नीचे चल रहा है। मैं इसमें पुट ऑप्शन बाय कर सकता हूं। ठीक है? तो दोस्तों ये था आपका इंट्राडे के ट्रेड के हिसाब से टूल। अभी चलते हैं और ऐसा टूल देखते हैं जो कल के लिए ट्रेड बताएगा यानी कि स्विंग ट्रेडिंग के लिए। तो आप टूल्स में आइए। Quant Models के अंडर में Trap Indicator को सेलेक्ट करिए। ठीक है? जो Trap Indicator है आप देखिए यहां पर आपको दो तरीके का सिग्नल मिलेगा। कॉल राइटर्स ट्रैप एंड पुट राइटर्स ट्रैप। ठीक है? कॉल राइटर ट्रैप का मतलब होता है कि उस पर्टिकुलर स्टॉक में बुलिश ट्रेड आया है। पुट राइटर ट्रैप का मतलब होता है कि वो पर्टिकुलर स्टॉक में बेरिश ट्रेड आया हुआ है। तो आप उसमें ट्रेड बना सकते हो। ठीक है? तो कल जब ये सिग्नल प्राइस के ऊपर जाता है जो कॉल राइटर्स ट्रैप है तो मैं उसमें ट्रेड बना सकता हूं। एंड पुट राइटर्स ट्रैप जो कि जैसे कि इसमें आप देख सकते हो Supreme Industries ये सारे स्टॉक हैं। तो कल अगर ये सिग्नल प्राइस के नीचे जाता है तो मैं इसमें बेरिश वाला ट्रेड बना सकता हूं। यही इसकी कंडीशंस होती है। ऑलराइट, आप इसको वेरियस टूल के साथ अलाइन कर सकते हो PCR के
साथ, फ्यूचर डाटा के साथ, जो आपको और भी अच्छी जानकारी दे सकते हैं और भी इसका डायरेक्शन बता सकते हैं। ऑलराइट। सो दोस्तों, यह था आज का सेशन, जिसमें मैंने क्लियरली आपसे डिस्कस किया कि अलग-अलग जो ट्रेड सेटअप है, मतलब अलग-अलग जो हमारा, मैं कहूंगा कि, कंडीशंस होती है, जो हमारा ट्रेडिंग स्टाइल है, स्कैल्पिंग, इंट्राडे, स्विंग ट्रेडिंग, उसमें किस तरीके का ट्रेडिंग की जा सकती है। ये सारा चीज मैंने डिस्कस किया। ऑलराइट? अलग-अलग मैंने आपको कांसेप्ट बताया। सो आई होप ये चीज आपको समझ में आई होगी कि आपको इंट्राडे में, प्लस आपको स्विंग ट्रेडिंग में और स्कैल्पिंग में कौन-कौन सा कंडीशन लेना चाहिए, कौन-कौन सा ऑप्शन स्ट्रेटजी जाना चाहिए, मैंने आपसे ब्रीफली डिस्कस किया है। सो आई होप आज का सेशन आपको पसंद आया होगा। आई होप आपको समझ में आया होगा कि जो स्प्रेड हम बनाते हैं ये स्विंग ट्रेडिंग के टाइम पे ज्यादा काम कर रहे हैं या इंट्राडे के बारे में काम कर रहे हैं। ऑलराइट, सो आई होप ये आपको क्लियर हुआ होगा। ऑलराइट, सो जुड़े रहिएगा Quantsapp के साथ। मैं ऐसे कुछ कांसेप्ट आपके सामने लाता रहूंगा। ऑलराइट, तो तब तक के लिए मैं धर्मेंद्र राजभर, आपका धन्यवाद।

PGDM in finance, having 5+ experience in Equity, commodities , forex analysis and trading.
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