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SEBI F&O Rules 2024: 7 Points for Traders (Hindi)

Intermediate·Hindi·13 min·1.3K views·1 year ago

This video walks through seven changes SEBI announced in 2024 for futures and options trading and how they affect retail traders.

The points covered are: only one weekly expiry per exchange (Nifty 50 on NSE, Sensex on BSE), the minimum index derivative contract value going from 5 lakh to 15 lakh, larger lot sizes, an extra 2% extreme loss margin (ELM) on short options on expiry day, upfront collection of option premium from buyers, removal of the calendar spread offset on expiry day, and intraday monitoring of position limits.

The speaker gives the start dates he mentions for the later changes (February and April 2025) and closes with how traders may need to adjust lot sizes and risk management.

What you’ll learn

✓Weekly expiries limited to one index per exchange: Nifty 50 and Sensex
✓Minimum index derivative contract value raised from 5 lakh to 15 lakh
✓Larger lot sizes and an extra 2% ELM on short options on expiry day
✓Upfront premium collection and no calendar spread offset on expiry day
✓Intraday monitoring of position limits and adjusting position size
Transcript

हेलो एवरीवन, मैं सभी का स्वागत करना चाहूंगा Quantsapp में। मेरा नाम है दिलजीत, एंड आज हम बात करने वाले हैं सेबी के जो नए रूल्स आए हैं उसके बारे में। ये जो 2024 में सेबी ने नए रूल्स एंड रेगुलेशंस लाए हैं F&O ट्रेडिंग पे, जो फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस में ट्रेडिंग करते हैं उनके लिए जो नए रूल्स लाए हैं, उसमें क्या-क्या चीजें आपको ध्यान में रखनी है, क्या-क्या चीजें हैं जो इंपॉर्टेंस आपको इफेक्ट कर सकती है, वो सारी चीजें आज हम इस वीडियो में कवर करेंगे। ओके, सो एंड तक बने रहिए। एंड अगर आपने अभी तक Quantsapp को साइन अप नहीं किया तो डू साइन अप नाउ। जैसे ही आप साइन अप करेंगे वैसे ही आपको 20 प्लस फ्री टूल्स मिलेंगे, जिससे आपकी ऑप्शंस ट्रेडिंग में आपको एक बेटर एज मिल सकता है। सो ऑप्शंस ट्रेडिंग करनी है तो Quantsapp में साइन अप करेंगे। यू कैन कम ऑन द लर्न सेक्शन हियर, वीडियो लाइब्रेरी पे जाएंगे, तो वीडियो लाइब्रेरी पे जैसे ही आप जाएंगे वैसे ही आप ओपन करते ही आपको मल्टीपल वीडियोस दिखेंगे, मल्टीपल स्ट्रेटजीज़, हम Quantsapp को यूज़ करके ऑप्शंस ट्रेडिंग के लिए एक बेटर एज किस तरह फाइंड आउट कर सकते हैं। एंड अगर आपको कोई भी तरह का डाउट या क्वेरीज है तो यू कैन रेज़ इट ऑन द सपोर्ट सेक्शन हियर, एंड सपोर्ट पे एक बार रेज़ कर देंगे तो हम आपकी मदद करने की कोशिश करेंगे। ओके, सो वीडियो पे आते हैं। तो देखिए, जो ये सेबी के जो नए

रेगुलेशंस है, वो काफी ज्यादा इंपॉर्टेंट रेगुलेशन जो है इस बार सेबी ने हमारे लिए लाए हैं। क्यों ये रेगुलेशंस लाए हैं? ताकि देखिए, जो इन्वेस्टर्स है, जैसे हमने रूल्स के बारे में पहले ही, हमने एक डिस्क्लेमर पढ़ा ही रहेगा कि नाइन आउट ऑफ 10 ट्रेडर्स है जो नुकसान कर रहे हैं, एंड ओनली वन आउट ऑफ 10 ट्रेडर्स जो है थोड़ा प्रॉफिट कर रहे हैं। सो ये जो चीज है, ये चीज जो है बहुत ज्यादा इफेक्ट करती है एज़ अ कंट्री इन होल। तो इसीलिए ये चीज को कम करने के लिए, या जो ये स्पेक्युलेटिंग नहीं है, या यू नो दे वांट टू अर्न क्विक प्रॉफिट्स या क्विक मनी, तो ये उनके लिए रेगुलेशन लाए हैं। क्योंकि देखिए, F&O ट्रेडिंग में ना कहीं ना कहीं काफी ज्यादा रिस्क बना रहता है, तो रिस्क को अगर आप एनालाइज करके प्रॉपर्ली इन्वेस्ट नहीं करते तभी तक आपके जो है इन्वेस्टमेंट सेफ नहीं है। सो ये जो रेगुलेशंस है, आइए इसके बारे में डिस्कशन करते हैं कि क्या है ये रेगुलेशंस। सो पहले मैं ब्लैकबोर्ड पे आ जाता हूं। सो जैसे कि आप देख सकते हो, सेवन पॉइंट्स है जो आपको ध्यान में रखने हैं सेबी के जो न्यू रूल्स है उसके ऊपर। सो आइए, चलिए एक-एक करके देखते हैं। ओके, सो फर्स्ट रूल इज़ वीकली एक्सपायरी

लिमिटेशंस। ओके, सो अभी यहां पे क्या हो गया कि जो सेबी है उन्होंने कहा है, जो हमारे एक्सचेंज है, सो BSE एंड NSE दोनों एक्सचेंज है, हमारे पास मल्टीपल एक्सपायरी थे मल्टीपल डेज़ पे। जैसे कि आपने ऑब्जर्व किया रहेगा कि Midcap Nifty का मंडे को, एंड देन FinNifty ऑन ट्यूज़डे, BankNifty ऑन वेडनेसडे, एंड थर्सडे को Nifty का, एंड फ्राइडे को Sensex का, राइट? सो इस तरह आप देखेंगे वीकली एक्सपायरी बहुत ज्यादा थी, एंड वीकली एक्सपायरी के ज्यादा होने के चलते वो जो पर्टिकुलर इंडेक्स या इंडेक्स में हम ज्यादातर देख रहे थे, काफी ज्यादा वोलेटाइल देख रहे थे। तो अभी ये लिमिटेशंस लगा दिए सेबी ने। सो वीकली अगर आप देखेंगे, वीकली एक्सपायरी में अभी हमारे पास दो ही रह गए हैं। सो एक जो है वो NSE ने जिसको ऑफर किया है, NSE ने कहा है कि हम Nifty में रखेंगे, सो Nifty 50 जो है। ओके, सो Nifty 50, जस्ट अ सेकंड, सो Nifty 50 में आपको यह वीकली एक्सपायरी अभी भी ऑब्जर्व करने को मिलेगी। बट Midcap Nifty हो, और यू नो FinNifty हो, BankNifty हो, तो वह सारे इसमें आपको यहां पर एक्सपायरी अभी से नहीं मिलेगी,

वहां पर से आपको मंथली एक्सपायरी मिलेगी। ओके, सेकंड, BSE की बात करें तो BSE ने ऑफर किया है Sensex को। सो Sensex 30 इज़ द BSE का जो इंडेक्स है, उसमें आपको वीकली ट्रेडिंग, यहां पर वीकली एक्सपायरी मिलेगी। उसके अलावा कोई भी पर्टिकुलर इंडेक्स में आपको वीकली एक्सपायरी नहीं मिलेगी। सो यह था फर्स्ट रेगुलेशन। आइए, चलिए नेक्स्ट पे आ जाते हैं। सो इंक्रीज़्ड मिनिमम अमाउंट, ट्रेडिंग अमाउंट। ओके, सो यह जो रूल है, एक्चुअली क्या हुआ है कि जो इंडेक्स में ट्रेडिंग करते हैं, तो इंडेक्स में ट्रेडिंग करने के लिए हमने ऑब्जर्व किया था जब भी मार्जिंस कम लग रहे थे, तो कहीं ना कहीं, अ, जो इन्वेस्टर्स है काफी ज्यादा एक्टिव, उसमें वॉल्यूम हम देख पा रहे थे। तो वॉल्यूम्स घटाने के लिए ये लोग ने क्या किया है कि 5 लाख से उसे 15 लाख कर दिया। सो इंडेक्स ट्रेडिंग में अगर आपको डेरिवेटिव्स का इंस्ट्रूमेंट यूज़ करना है तो नाउ योर लिमिटेशन इन ट्रेडिंग, जो आपका अमाउंट है, वो कहीं ना कहीं थोड़ा इंक्रीज़ हो जाएगा, फ्रॉम 15, 5 टू 15, सॉरी। ओके, नेक्स्ट बात करेंगे लार्जर कॉन्ट्रैक्ट

साइज़ेस का। ओके, सो जैसे अभी आपने ऑब्जर्व किया, Nifty का 25 कॉन्ट्रैक्ट साइज़ है, सिमिलरली, अ, बेसिकली BankNifty की 15 क्वांटिटी है उसका लॉट साइज़। सो ये जो लॉट साइज़ है, हम उसमें भी इंक्रीज़ देखेंगे। सो मे बी वो 15 का 30 हो सकता है, 15 का 45 हो सकता है, अगेन Nifty का 25 से 50 हो सकता है। सो लॉट साइज़ में जो हम इंक्रीज़ देखेंगे, वो हम ऑलमोस्ट यहां पे देखेंगे, रेंज यहां पे दिया गया है, सो 15 टू 20 लाख का आपका जो मार्जिन कैपिटल है, वो उस तरीके का एक रेंज बनेगा। कि अगर आपको यहां पे कॉन्ट्रैक्ट साइज़ जो अगर इंक्रीज़ होता है, तो कहीं ना कहीं वो आपको ट्रेडिंग में थोड़ा मार्जिन ज्यादा लग सकता है, इवन एज़ अ बायर। तो बायर के लिए यहां पे मार्जिन थोड़ी इंक्रीज़ हो जाएंगी, और सेलर के लिए यहां पे थोड़ा और ज्यादा इंक्रीज़ हम देख पाएंगे, राइट? सो कॉन्ट्रैक्ट साइज़ इंक्रीज़ होएगा तो सम वेयर यहां पे आपको जो इन्वेस्टमेंट अमाउंट है वो भी थोड़ा ज्यादा लग सकता है, राइट? सो कॉन्ट्रैक्ट साइज़ में हम इंक्रीज़ देखने वाले हैं सेबी की तरफ

से। नाउ द नेक्स्ट पॉइंट इज़, अ, एडिशनल मार्जिन ऑन एक्सपायरी डे। ओके, सो ये जो मार्जिन है ये सेलर्स के लिए है, जो शॉर्ट पोजीशंस बनाते हैं। जनरली एक्सपायरी के दिन हम ऑब्जर्व करते हैं कि लोग क्या करते हैं, CE एंड PE बोथ सेल कर देते। ओके, सो दे विल सेल दिस एंड दे विल सेल दिस, और क्या आएगा? जनरली एक स्ट्रैडल या स्ट्रैंगल, उस पे भी थोड़ा एडिशनल मार्जिन लगेगा, ऑलमोस्ट अराउंड 2% का मार्जिन हमें एक्स्ट्रा लगेगा। ऑन व्हाट बेसिस? तो ये ELM के बेसिस पे है। सो ELM क्या है? सो एक्सट्रीम, एक्सट्रीम लॉस मार्जिन। ओके, सो यह है फुल फॉर्म ELM का, एक्सट्रीम लॉस मार्जिन। सो अगर यहां पे देखिए, इंडेक्स की अगर एक्सपायरी में अगर आप ट्रेड कर रहे हो, तो आपने कभी-कभार देखा रहेगा कि जो मोमेंटम है, कभी-कभी बहुत बिग मोमेंटम या बहुत बड़ी-बड़ी मोमेंटम हम इधर साइड पे देखते हैं। तो वही एक्सट्रीम लॉसेस को अगर कवर नहीं कर पाए सेलर्स, तो उसी लिए

ये जो मार्जिन है, वो थोड़ी एक्स्ट्रा मार्जिन यहां पे आपको जो शॉर्ट पोजीशंस के लिए लगेगी। अभी बात करते हैं फिफ्थ पॉइंट की, दैट इज़ द अपफ्रंट प्रीमियम कलेक्शन। सो बेसिकली अभी क्या होने वाला है? सो फ्रॉम फरवरी 2025 से ये रूल लागू होएगा। इसमें क्या होएगा? जो बायर्स है वहां से पहले ही प्रीमियम कलेक्ट कर लिए जाएंगे। क्योंकि, क्योंकि यहां पे देखिए, प्रीमियम पेमेंट के डिफॉल्ट्स ना होए, और मे बी बेसिकली प्रीमियम में कुछ भी ऊपर नीचे ना होए, इसीलिए दे वांट एन अपफ्रंट प्रीमियम कलेक्शन। वो लोग पहले ही प्रीमियम कलेक्ट कर लेंगे, सो दैट बाद में जाके कोई चीज वहां पे ऊपर नीचे ना होए। तो कलेक्शन पहले ही कर लिए जाएंगे, और यह रूल होएगा फरवरी 25 से लागू हो जाएगा। अभी बात करते हैं कैलेंडर स्प्रेड मार्जिन की। ओके, सो अगेन दिस इज़ वेरी इंटरेस्टिंग। जो कैलेंडर स्प्रेड है, बेसिकली कैलेंडर स्प्रेड में क्या करते हैं लोग? जनरली दे बाय दिस एक्सपायरी, लेट्स सपोज़ कॉल ऑप्शन या पुट ऑप्शन बाय करेंगे, एंड वो लोग नेक्स्ट एक्सपायरी या मंथली एक्सपायरी का जाके सेल कर देते। तो इससे क्या होता था? इससे ना एक पोजीशन जो थी ना,

पोजीशन यहां पे ऑफसेट हो जाती थी। सो ऑफसेट करने की, जो अभी पोजीशन ऑफसेट कर सकते थे, अभी से वो बंद हो जाएगी। सो नो ऑफसेटिंग ऑफ पोजीशंस। जो हमने यहां पे, अ, सेबी ने यहां पे ये रूल इसीलिए निकाला है ताकि लोग पोजीशंस ऑफसेट ना कर सकें। क्यों? क्योंकि यहां पे क्या होता है कि जब भी आप पोजीशंस ऑफसेट करते हैं या कैलेंडर स्प्रेड यूज़ करते हैं, तो आप क्या कर सकते हो? आप प्राइस वोलैटिलिटी की रिस्क ज्यादा देख सकते हो। क्योंकि प्राइस, देखिए, अगर आपको सस्ते में एक अच्छा ऑफसेट करके पोजीशन मिल रहा है, तो ऐसे कई पोजीशंस क्रिएट हो सकते हैं जिससे प्राइस मोमेंटम हम अच्छी खासी देख सकते हैं। सो इसीलिए ये जो प्राइस वोलैटिलिटी रिस्क जो है, उसको मिनिमाइज़ करने के लिए यह वाला जो रूल है वो लगा है। एंड अगेन, यह रूल कब लागू होएगा? ये अगेन फरवरी 2025 को लागू होएगा। फरवरी 25, 2025 से ये हम कैलेंडर स्प्रेड में जो है मार्जिन के अंदर एक चेंज देखेंगे, जिससे आपको जो है, वो जो जनरली हमने ऑब्जर्व किया था कि नॉर्मल कोई तरह का स्प्रेड बनाएंगे एंड कैलेंडर स्प्रेड बनाएंगे, तो सम वेयर कैलेंडर स्प्रेड में थोड़ा मार्जिन कम लगता था। तो अभी मे बी दे विल इक्वलाइज़ इट, और इंक्रीज़ भी कर सकते हैं। तो यह मार्जिनल चेंज हम देख पाएंगे कैलेंडर स्प्रेड्स में। लास्टली,

सेवंथ पॉइंट है यहां पे कि इंट्राडे में पोजीशन जो है उसको मॉनिटर करेगी सेबी। ओके, सो सेबी जो है ब्रोकर्स को, एंड यू नो बेसिकली आप जो ट्रेड्स इंट्राडे में होल्ड कर रहे हैं, जो भी पोजीशंस आपकी ओपन है, उसे मॉनिटर किया जाएगा। ओके, उसको मॉनिटर करके उसमें, हम, वो लोग का एनालिसिस रहेगा कि बेसिकली किसी तरह का चीज ऊपर नीचे ना होए, मार्जिंस प्रॉपर्ली कलेक्ट हो रहे हैं, एंड यू नो सेटलमेंट बराबर हो रही है। सो यह जो है इंट्राडे के अंदर की मॉनिटरिंग जो है, वो सेबी की तरफ से हम ऑब्जर्व करेंगे, एंड इट विल बी अप्लाइड ऑन अप्रैल 25। सो अप्रैल 2025 से हम ये जो है इंट्राडे मॉनिटरिंग देखेंगे सेबी की तरफ से। राइट, सो दीज़ वर द सेवन पॉइंट्स जो सेबी ने यहां पे नए रूल्स लगाए हैं, तो ये सारी चीजें आपको जरूर ध्यान में रखनी चाहिए, एंड उसके बेस पे आपका अभी नया ट्रेडिंग स्टाइल होना चाहिए। क्योंकि देखिए, नए रूल्स आते हैं तो ऑब्वियसली आपकी मार्जिन, जैसे मैंने बताया आपको कि मार्जिंस में थोड़ा इंक्रीज़ हम देखेंगे, कॉन्ट्रैक्ट साइज़िंग में इंक्रीज़ देखेंगे, तो वहां पे आपकी ट्रेडिंग में कहीं ज्यादा इफेक्ट होएगा। अगर आप अभी 10 लॉट पे कर रहे थे तो अभी आप पांच लॉट पे आ जाएंगे, राइट? सो वो चीज जरूर ध्यान में

रखिए कि आप रिस्क मैनेज करके प्रॉपर्ली एक ट्रेडिंग सेटअप बना सकते हैं, राइट? सो टू कंक्लूज़न, बात किया, ये कंक्लूज़न चाहूंगा कि देखिए, ये जो रूल्स है, आई नो वो थोड़े स्ट्रिक्ट रूल्स है, बट अगेन ये जो रूल्स है ये रिटेल ट्रेडर्स एंड जो इन्वेस्टर्स हैं उन लोग के लिए है, ताकि वो लोग स्पेक्युलेटिंग करके... सो फॉर द इन्वेस्टर्स ये जो चीज है, एक अच्छा रूल लाया गया है। आप अगर हाई लेवल के इन्वेस्टर हो तो आप यहां पे एक सीरियसनेस हम ज्यादा देखेंगे इन्वेस्टमेंट में। मार्केट की वोलैटिलिटी या वॉल्यूम में थोड़ी हम डिक्रीज़ देखेंगे, बट कहीं ना कहीं एक सीरियस इंटेंट के साथ ट्रेडिंग हम ऑब्जर्व करेंगे, एंड स्पेक्युलेटिंग में काफी ज्यादा घटाव हम देख पाएंगे, राइट? सो थैंक यू सो मच गाइज़ फॉर वॉचिंग दिस वीडियो। अगर आपको यह वीडियो अच्छा लगा तो लाइक कर देना, डू शेयर इट, एंड अगर आपको कोई भी तरह का डाउट्स या क्वेरीज़ है तो यू कैन ड्रॉप इट इन द कमेंट्स। थैंक यू सो मच फॉर वॉचिंग।

SPEAKERDiljeet UppalTrainer , Quantsapp

With over five years of exposure to financial markets, He possesses a nuanced grasp of Technical, Fundamental, and Derivatives Analysis. His passion lies in sharing this expertise with others, Illuminating the complexities of market dynamics for all to understand. He is committed to empowering others with the knowledge needed to navigate the financial realm with assurance.

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